दो दोस्तों की कहानी : असत्य पर सत्य की जीत


एक आदमी उसका नाम राज और उसके दोस्त  का नाम नाज था । राज ईमानदार और नाज बईमान था । राज की एक छोटी सी कपड़े की दुकान थी और नाज की बड़ी फैक्टरी थी। नाज बड़ा धनी और राज गरीब था । फिर भी दोनो दोस्त थे । राज नाज को कहता रहता कि कभी किसी को किसी के साथ भी बेईमानी, धोखा नही करना चाहिए क्योंकि बेईमानी सब कुछ ड़ुबो  देती है लेकिन नाज मन ही मन हँसता  और कहता कि बेईमानी से ही तो पैसा मिलता है ।कई वर्ष तक जैसा था वैसा ही चलता रहा राज अपने कपड़े के लिए किसी अच्छी जगह से ही सामान खरीद ता था । वह अच्छा कपड़ा बनाता था और सस्ते मे भी बेचता था और ज्यादा फायदा नुकसान नही देखता । वह पुरी मेहनत करता उसकी दुकान मे एक और आदमी काम करता वह आदमी अपनी तनख़्वाह से खुश था । वह दोनो ही दुकान को संभालने थे । वही नाज बहुत ही घटिया सामान का इस्तेमाल करता था वह महंगा कपड़ा के बेचता उसकी फैक्टरी पर कई लोग काम करते उनकी तनख़्वाह भी कम थी । नाज कपड़ो के लिए ड़िजाइन कही से चुरा लेता था । वह चाहता था कि उसका मान और पैसा बड़े । इसलिए वह बेईमानी से पीछे नही हटता  ।राज को पैसा ज्यादा प्रिय नही था । इसलिए वह खुश रहता और ईमानदारी करता बेईमानी नही। फिर एक दिन  दोनो उठे काम को जाने के लिए निकले रास्ते मे एक दूसरे से मिलने दो मिनट बात करते फिर राज अपनी दुकान पर  और नाज अपनी फैक्टरी चले गये । राज की दुकान पर एक आदमी आया  वह एक बड़ा अफसर था । उसने कपड़े खरीदे और चला गया । वह अफसर फिर नाज की फैक्टरी पर गया उससे कपड़े खरीदे और चला गया इसी तरह कई दुकानो फैक्टरी पर  गया और कपड़े खरीदे । सभी दुकानो फैक्टरी के कपड़े टेस्ट के लिए भेज दिये । सात दिन बाद उसने एक प्रोग्राम रखा । उसमे सभी कपड़े वालो बुलाया । कई लोग भी आये राज और नाज भी आये । उन सभी बीच अफसर आया और कहने लगा कि सभी कपड़े का मेने टेस्ट किया सभी चौक गये कि वह आदमी एक अफसर है ।अफसर ने कहा कि राज का कपड़ा सबसे बेहतरीन है हम उसे एक फैक्टरी देते है  और सबसे घटिया कपड़ा नाज का है हम उसकी फैक्टरी बंद कर ने का आदेश देते है । नाज बहुत उदास हुआ उसने सोचा कि राज सही कहता है कि हमे कभी बेईमानी नही करनी चाहिए । तभी वहा राज आया और कहा कि तुमने बेईमानी की कोई बात नही अब तुमे अपनी गलती का एहसास हो गया है ।अब हम दोनो साथ मे फैक्टरी चलाएंगे वह भी ईमानदारी ठीक है नाज ने हां कही और बहुत खुश हुआ । दोनो ईमानदारी से फैक्टरी चलाने लगे  इसलिए इनको कई ईनाम भी मिले ।




शिक्षा - हमे कभी भी बेईमानी नही करनी चाहिए क्योंकि बेईमानी करने वाला एक दिन जरूर ड़ुबता है ।

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